सूर्य का गर्व


शुरूआती विज्ञान में मिश्र यूनानी खगोलशास्त्री जिनका नाम था क्लाडियस टॉलमी ने 140 ई. में प्रतिपादित किया की पृथ्वी को पूरे ब्रह्मांड का केन्द्र है। माना जाता था की सभी ग्रह और आकाशीय पिंड पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। इसे जियोसेंटरिक थ्योरी कहा जाता था।

फिर एक खगोलशास्त्री जिन्हे हम निकोलस कॉपरनिकस के नाम से जानते हैं, ने यह कहा की सूर्य ब्रह्माण्ड के केन्द्र मे स्थित है। सभी ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं। सूर्य को तब ब्रह्माण्ड का केन्द्र माना जाने लगा, पर यह जादा समय के लिए ना रहा और यह सूर्यकेन्द्रीय ब्रह्माण्ड की धारणा समाप्त हो गई।

जोहनेस केप्लर ने सूर्य को केन्द्र मानते हुए सोलहंवी सताब्दी में ग्रहों की परिक्रमण कक्षाओं की खोज की, पर जैसे ही बीसवीं शताब्दी में हमारी मंदाकिनी (गलैक्सी)  की तस्वीर स्पष्ट हुई और सूर्य को इसके कोने पर पाया गया तब से सूर्य के ब्रह्माण्ड के केन्द्र पर होने की अवधारणा समाप्त हो गई।
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