ग्रंथियों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य



ग्रंथियाँ

बहिस्रावि ग्रंथियाँ – ये ग्रंथिया नलिकायुक्त होती हैं इनसे एंजाइम का स्राव होता है। जा शरीर की रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेता है।

यकृत
इसका भार लगभग 1500 ग्राम होता है। यह शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथी है। यकृत में हेपेटिक कोशिका पाई जाती है। जो पित्त रस का स्राव करती है। पित्त रस एक क्षारिय द्रव्य है। जो भोजन को अम्लिय से क्षारिय में बदलता है। इसकी कमी से एंजाइम का स्राव नही होता है। यह भोजन को भौतिक रूप से तोड़ता है रासायनिक रूप से नही। यकृत में वसा का विखण्डन होता है इसे इमल्सिफिकेशन कहते हैं (पाईसी करण)। यकृत शरीर का सबसे जल्दी ठीक होने वाला अंग है।
यकृत में ग्लूकोज से ग्लाईकोजिन बनने कि क्रिया ग्लाईकोजिनसिस कहलाती है जो इन्सुलिन हार्मोन के कारण बनता है। यकृत में पुनः ग्लाईकोजिन ग्लूकोज में बदलता है जिसे ग्लाईकोजेनेलाएसिस कहते हैं जो ग्लूकैगान हार्मोन के कारण बनता है। मनुष्य के शरीर में उपापाचय के बाद प्रोटीन का अपशिष्ट पदार्थ के रुप में जो बनता है वह अमोनिया बनाता है। यकृत में आर्लीछीन चक्रण के माध्यम से यूरिया में बदल जाता है।
कुछ ऐसे स्तनधारी जिनके पित्त रस से पित्ताशय नही बनता – ब्लु व्हेल, घोड़ा, गधा, चूहा, जिराफ

अगनाश्य
(पैंक्रियास) यह मिश्रित ग्रंथि है।

आहर नाल-
मुख गुहिका – लार ग्रंथि(म्युकन – भोजन में लसलता) (टायलिन- अम्लीय 6.4), कार्बोहाइड्रेट
ग्रास नली – म्यूकस
अमाश्य – जठर ग्रंथि(जठर रस – HCL पेट का अम्ल)
नोट – रेनिन – दुध का केसीन प्रोटीन, पेप्सिन – प्रोटीन का पाचन
यकृत – पित्त रस
अग्नाश्य – अमाश्यिक रस – पूर्ण पाचक एंजाइम (लाईज – वसा, माइलेन – कार्बो., ट्रिप्सिन - प्रोटीन)
छोटी आँत – अन्तिय रस (पूर्ण पाचन)
भोजन का पाचन – अन्तः ग्रहण, पाचन, अवशोषण रक्त, स्वागिकरण – जीवद्रव्य, बहिर्गमन

अंतःस्रावी – यह ग्रंथियाँ नलिका विहिन होती हैं इनसे हार्मोन स्रावित होते हैं।

पीयूष ग्रंथी – (पिट्टयूरी) यह ग्रंथी मष्तिष्क में पाई जाती है इसे मास्टर ग्रंथी भी कहते हैं क्यूंकि यह सभी ग्रंथियों के कार्य को नियंत्रण करती है और यह शरीर की सबसे छोटी ग्रंथी है।

कुछ प्रमुख हार्मोनो के कार्य
STH/GH – Stomata tropic Harmon/ Growth Harmon
मिलैलोसाईट – मिलैनिन (वर्णक)
आक्सीटोसिन – (स्त्री) प्रस्व पीड़ा उत्पन्न
ADH – वेसो प्रेसिन – एंटी डाय्यूरेटिक हार्मोन – मूत्र की मात्रा नियंत्रण करता है।
मनुष्यों मे मिलैनिन का स्राव उष्णकटिबंधिय क्षेत्र में होता है।

पिनियल काय ग्रंथी – यह ग्रंथी मष्तिष्क में पाई जाती है। इस ग्रंथी से मिलेटोनिन हार्मोन का श्राव होता है जो तेज प्रकाश में अधिक स्रावित व कम प्रकाश में कम स्रावित होता है। इस ग्रंथी को शरीर की जैविक घड़ी या तीसरी आँख भी कहा जाता है। यह हमारी शारीरिक वृद्धि का नियंत्रण करता है। (शरीर का वृद्धि रोधक हार्मोन)

थाइराईड ग्रंथी – यह ग्रंथी गले में पाई जाती है। यह सबसे बड़ी अंतः स्रावि ग्रंथी है। इससे थाइराईड हार्मोन का स्राव होता है। जो आयोडिन को स्रावित करता है। इस हार्मोन का कार्य मनुष्य के शरीर में उपापचय का नियंत्रण करता है। इसकी कमी से ग्वायटर (घेंघा) रोग होता है।
कैल्सिटोनिन हार्मोन भी थाईराइड ग्रंथी से स्रावित होता है यह कैल्सियम की मात्रा को नियंत्रित करता है।

पैराथाइराईड ग्रंथीCa1P पैराथाईरिक्जन – ये ग्रंथी भा गले में पाई जाती है। इससे पैराथैरिक्सन हार्मोन का स्राव होता है। जो कैल्सियम और फास्फोरस को स्श्रावित करता है। इसकी कमी से हाइपौकैल्सिया और टिटनस रोग होते हैं। इसकी अधिकता से वृक्क में पथरी बनती है। इसमे कैल्सियम ऑक्सीलेट पाया जाता है।

थाईमस ग्रंथी – यह ग्रंथी सीने में पाई जाती है इस ग्रंथी से हाईमीसीन हार्मोन का स्राव होता है जो बच्चों में लिंफोसाईट या प्रतिरक्षा तंत्र को बनाता है। यह ग्रंथी बुड़ापे में नष्ट हो जाती है।
शरीर में WBC व टॉनसिल भी लिंफोसाईट बनाते हैं।

एंड्रीनल ग्रथी – वृक्क (आपातकालीन ग्रंथी) यह अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रण करने वाला हार्मोन का स्राव करती है। इसे 3F हार्मोन भी कहते हैं।
1.     एन्ड्रोजन – नर हार्मोन
2.     एस्ट्रोजन – मादा हार्मोन
3.     प्रोजेस्टेशन – गर्भ धारण करने वाला हार्मोन
4.     रिलेक्सिन – प्रसव में स्रावित होता है
5.     टिन्टोस्टेशन – पुरूषों मे दाढी और मूछ

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