वसा (एस्टर, बंध) से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य


वसा (एस्टर, बंध)

-    ये कार्बन, हाईड्रोजन, ऑक्सीजन का मिश्रण है। इससे अधिकतम उर्जा प्राप्त होती है। मनुष्य के शरीर में वसा का संचरण लाईपो प्रोटीन के द्वारा होता है। यह जल में अघुलनशील व पेट्रोलियम, बैंजीन, ईथर और एलकोहल में घुलनशील होता है। वसा हाईड्रोजन बंध के द्वारा जुडी होती है। ये दो प्रकार की होती है – संतृप्त व असंतृप्त

-    संतृप्त – वह वसा जो कम ताप पर ठोस या अर्धठोस होती है। सभी जंतु वसाएं संतृप्त वसाएं है , नारियल तेल संतृप्त वसा है, परंतु मछली की वसा असंतृप्त वसा है।

-    असंतृप्त वसा – वह वसा जो कम ताप पर सदैव तेल बनी रहती हैं। उसे असंतृप्त वसी कहते हैं। सभी वनस्पति वसाएं और मछली की वसी असंतृप्त होती है।

-    डालडा घी या वन्सपति घी बनाने कि प्रक्रिया हाईड्रोजनीकरण कहलाती है। जिसमें उत्प्रेरक के रूप में निकिल का प्रयोग किया जाता है। शुद्ध देशी घी में डालडा कि मिलावट का पता लगाने के लिए निकिल टेस्ट किया जाता है। मनुष्य के शरीर में वसा का संचय ऐडिपोज उतक में होता है। जिसे वसा गोदाम कहते हैं।

-    कोलेस्ट्रोल वसा – यह एक संतृप्त वसा है जिसमें अमलिय वसा पाई जाती है। इसकी अधिकता हृदय घात कि संभावना को बढा देती है। स्टेरोईटस भी एक कोलेस्ट्राल वसा है। जिसका प्रयोग वर्तमान में खिलाडी शक्तिवर्धक के रूप में करते हैं। इसके लिए खिलाड़ियों को डोप टेस्ट कराना होता है।

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