संवैधानिक और गैर-संवैधानिक में अंतर

भारत; राज्यों का संघ है. यहाँ पर विभिन्न जाति, धर्म और भौगोलिक स्थिति के लोग रहते हैं. सभी राज्यों की अपनी अलग प्रकार की जरूरत होतीं हैं और कई ज़रूरतों को संवैधानिक और गैर-संवैधानिक संस्थाओं की मदद से पूरा किया जाता है. इस प्रकार भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को संवैधानिक और गैर-संवैधानिक संस्थाओं के सहयोग से चलाया जाता है।

संवैधानिक संस्थाओं की परिभाषा (Constitutional Bodies): ये वे संस्था हैं जिनका उल्लेख भारत के संविधान में किया गया है और इसलिए इन्हें स्वतंत्र और अधिक शक्तिशाली माना जाता है।

उदाहरण: चुनाव आयोग, संघ लोक सेवा आयोग और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग इत्यादि


    संवैधानिक निकाय का नाम
       अनुच्छेद
     वर्तमान अध्यक्ष इस प्रकार हैं

1. चुनाव आयोग
 अनुच्छेद 324
  सुनील अरोड़ा (23 वें)

2. संघ लोक सेवा आयोग
 अनुच्छेद -315 से 323
  अरविंद सक्सेना

3. राज्य लोक सेवा आयोग
 अनुच्छेद -315 से 323
  हर राज्य में अलग

4. वित्त आयोग
 अनुच्छेद -280
  डॉ. वाई. वी. रेड्डी (14वें)

5. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
 अनुच्छेद -338
  राम शंकर कठेरिया

6. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग
 अनुच्छेद -338 A
  नंद कुमार साय

7. भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक
 अनुच्छेद -148
  राजीव महर्षि

8. भारत के महान्यायवादी
 अनुच्छेद -76
  के. के. वेणुगोपाल

9. राज्य के महाधिवक्ता
  अनुच्छेद -165
  हर राज्य में अलग

10. भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी
 अनुच्छेद -350 B
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गैर-संवैधानिक संस्थाओं की परिभाषा (Non-Constitutional Bodies): गैर संवैधानिक या अतिरिक्त संवैधानिक संस्था समान ही होते हैं. ये संस्थायें देश के संविधान में लिखित नहीं हैं. अर्थात इनके गठन के लिए केंद्र सरकार को संसद में बिल पास करना पड़ता है. अंततः ऐसे निकाय गैर-संवैधानिक निकाय होते हैं जो कि किसी विशेष उद्येश्य की पूर्ती के लिए गठित किये जाते हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) एक संवैधानिक संस्था नहीं है, क्योंकि इसकी स्थापना 1963 में गृह मंत्रालय के एक प्रस्ताव द्वारा की गई थी. इसका काम देश में अपराध, घोटाला और इंटरनेशनल क्राइम के मामलों की जाँच करना होता है.


 गैर संवैधानिक निकाय का नाम
  वर्तमान अध्यक्ष इस प्रकार हैं। 

 1. नीति आयोग
 नरेंद्र मोदी

 2. राष्ट्रीय विकास परिषद
 नरेंद्र मोदी

 3. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
 पूर्व CJI एचएल दत्तू

 4. राज्य का मानवाधिकार आयोग
 हर राज्य में अलग

 5. केंद्रीय जांच ब्यूरो
 ऋषि कुमार शुक्ला

 6. केंद्रीय सतर्कता आयोग
 श्री के वी चौधरी

 7. लोकपाल और लोकायुक्त
 पिनाकी चंद्र घोष

 8. राज्य सूचना आयोग
 हर राज्य में अलग

 9. केंद्रीय सूचना आयोग
 श्री सुधीर भार्गव
इसलिए उपरोक्त व्याख्या से यह स्पष्ट है कि सरकारी निकाय प्रकृति में अधिक शक्तिशाली और स्थायी हैं जबकि अन्य गैर-संवैधानिक निकाय देश की आवश्यकताओं के अनुसार बनाए गए हैं और सरकार के निर्णय के आधार पर उन्हें समाप्त किया जा सकता है। जैसा कि हमने भारत के योजना आयोग के मामले में देखा था जिसे 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था.
गैर-संवैधानिक संस्थाओं और संवैधानिक संस्थाओं के साथ-साथ उनके संबंधित अध्यक्षों की सूची विभिन्न परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इसलिए इस सूची को बहुत ध्यान से पढ़ने की जरूरत है।

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